ये खामोश सी शाम
ये खामोश सी शाम दूर दिशामें रंग बिखेरती ओझल हो रही, ये खामोश सी शाम लम्हा लम्हा ढल रही वक्त के पैमानो में खूद को उडेल चल रही, ये खामोश सी शाम तन्हा सी, बेचैन सी, कतरा कतरा बिखरी सी, फिर भी मुस्कान होंठों पे धर संभल रही, ये खामोश सी शाम