दिल पे दस्तक!
दिल के दरवाजे के उपर इक हल्की सी दस्तक पडी,
जिंदगी जो छोड़ गई थी उसी राह की ओर चली,
अरमान छोटे छोटे थे,
कुछ ख्वाब मोटे मोटे थे,
बिखर गई जो कड़ीयाँ थी उन कड़ीयाँ को जोड रही,
जिंदगी जो......
दिखावे में पहनावे में,
दंभ भरे इस छलावे में,
उलझे पडे़ जो बंधन थे ऊन बंधन को खोल गई,
दिल के दरवाजे के उपर इक हल्की सी दस्तक पडी,
जिंदगी जो छोड़ गई थी उसी राह की ओर चली,
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