भार

मन पर थोडा भार पडा था, 
तब से वो बेकार पडा था।

उस बेकार से मन को थोडा टटोला,
दबे हुए जज्बातों को खोला।

और फिर लगा कि... 

क्यों न खुल के कुछ ऐसे जीया जाये,
इस बदले बदले मौसम और मिज़ाज का मज़ा लीया जाए।

Comments

Popular posts from this blog

Power of positive thinking --3 Happiness

#_सुकून की तलाश कर

Power of Positive thinking -4 Energy.