#_सुकून की तलाश कर

 ए जिंदगी इतनी नाराज क्यों है तु ?

क्या है वज़ह?

इतनी खामोश क्यों है तु?


क्या ढूंढ रही हो,

इतनी बेचैन होकर?

तड़पती रातों की आगोश में क्यों है तु ?


ख़ुद को खोल दे खुदा के इस समंदर में,

बहने दे,

और ,

बजने दे सुरीला संगीत उसका अपने दिल में,

ख़ुद से ही इतनी नासाज़ क्यों है तु ?


ए जिंदगी बहने दे अपने आप को,

डुबोकर इस गहरे समंदर में,

अपनी नादानियत को तराश कर,

अपनी मासूमियत को तराश कर,

कहने दे कहे जो यह संसार सारा,

अपने दिल को साफ कर 

और सुकून की तलाश कर।


 ए जिंदगी इतनी नाराज क्यों है तु ?

क्या है वज़ह?

इतनी खामोश क्यों है तु?

#_सुकून की तलाश कर।








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