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जिंदगी।

ये जिंदगी भी अजीब सी है न ठहरती है न ठहराव देती है बेवजह उलझती सी उलझनो में थोडे टकराव थोडे घाव देती है ये जिंदगी भी अजीब सी है न ठहरती है न ठहराव देती है आसाँ करने के कुछ प्रयास भी विफल कर कभी डुबाती तो कभी बहाव देती है ये जिंदगी भी अजीब सी है न ठहरती है न ठहराव देती है

ये खामोश सी शाम

ये खामोश सी शाम दूर दिशामें रंग बिखेरती ओझल हो रही, ये खामोश सी शाम लम्हा लम्हा ढल रही वक्त के पैमानो में खूद को उडेल चल रही, ये खामोश सी शाम तन्हा सी, बेचैन सी, कतरा कतरा बिखरी सी, फिर भी मुस्कान होंठों पे धर संभल रही, ये खामोश सी शाम

दिल पे दस्तक!

दिल के दरवाजे के उपर इक हल्की सी दस्तक पडी, जिंदगी जो छोड़ गई थी उसी राह की ओर चली, अरमान छोटे छोटे थे, कुछ ख्वाब मोटे मोटे थे, बिखर गई जो कड़ीयाँ थी उन कड़ीयाँ को जोड रही, जिंदगी जो......  दिखावे में पहनावे में, दंभ भरे इस छलावे में, उलझे पडे़ जो बंधन थे ऊन बंधन को खोल गई,  दिल के दरवाजे के उपर इक हल्की सी दस्तक पडी, जिंदगी जो छोड़ गई थी उसी राह की ओर चली,

खुश!!

यूँ ही नहीं खुदाने दांव तुझपे लगाया, यूँ ही नहीं भरोसा बारबार तुझमें दिखाया, दिन - महीने - बरस उधार दिए हैं तुझे उसने, इसलिए, खुद को बेहतरीन बनाने की कोशिश हरदिन किया कर, खुश रहे और दुसरो को भी खुश रखकर जीया कर!!!!