पहले तो खुद से प्यार करना सीख लें।

 पहले तो खुद से प्यार करना सीख लें।


क्या है?

क्यों है?

न जाने कितनी बेचेनियाँ है?


ढेर सारे सवाल...,

कितनी हि उलझी हुई गुत्थियां यूं फैली है?


ना जवाब का ठिकाना है, ना कोई हल मिल रहा।

बस चारों ओर फैली सिर्फ खामोशियां है।


फिर भी खुद से प्यार करना सीख लें ए बंदे,

जो भी है सिर्फ तेरे भीतर पड़ा है।

खुद से प्यार करना सीख लें रे बंदे बहुत।

जो भी है सिर्फ भीतर हे।(2)

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