खुशियों का मकाम

चल जिंदगी इक मकाम ढूंढ़ते हैं,

थोड़ा नया सा कोई काम ढूंढ़ते हैं,

महकती रहे खुशियों की डालियां हरघड़ी,

फुलों से भरा बागबान ढूंढते हैं।


और याद आती है वो शरारतें, वो मस्तीयां,

वो मासूमियत,

वो हंसी,

और वो बेफिक्र घूमना फिरना,

चल जिंदगी इक बार फिरसे वही बचपन का दिल ए नादान ढूंढते हैं ,



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